हरतालिका तीज प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का पर्व-अंजना परिहार

भारतीय संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होते, वे जीवन-मूल्यों और आदर्शों के संदेश भी संप्रेषित करते हैं। इन्हीं में से एक है हरतालिका तीज, जो नारी-समर्पण, प्रेम और वैवाहिक सौभाग्य का प्रतीक पर्व माना जाता है।
‘हरत’ का अर्थ अपहरण तथा ‘आलिका’ का अर्थ सखी (महिला मित्र) होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब माता पार्वती के पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से निश्चित किया, तब उनकी सखियों ने उनका अपहरण कर लिया, ताकि उनका विवाह उनके मनचाहे वर भगवान शिव से ही हो सके। माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने हेतु 108 जन्मों तक तपस्या की। उनके अटूट समर्पण और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से यह दिन स्त्रियों के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना हेतु यह व्रत प्रचलित हुआ।
हरतालिका तीज के दिन महिलाएँ प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं। अनेक स्थानों पर सोलह श्रृंगार करने की परंपरा प्रचलित है। इसके पश्चात वे मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। पूजा-अर्चना के समय मिट्टी का दीपक जलाकर पूरी रात प्रज्वलित रखना शुभ माना जाता है।
इस दिन महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाओं का पूजन करती हैं। संध्या समय तीज के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं और सखियों के साथ पुष्पों से सजे झूलों पर झूलने की परंपरा भी विशेष आनंद देती है।
हरतालिका तीज पर महिलाओं को उनके मायके एवं ससुराल से उपहार स्वरूप पारंपरिक परिधान, चूड़ियाँ, मेहंदी, सिंदूर, घेवर और अन्य मिठाइयाँ भेंट की जाती हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पारिवारिक स्नेह और सामाजिक सौहार्द को भी सुदृढ़ करता है।
हरतालिका तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम की विजय और वैवाहिक जीवन की प्रेरणा है।
इस पावन अवसर पर समस्त महिलाएँ सुख, समृद्धि और वैवाहिक आनंद का आशीर्वाद प्राप्त करें यही मंगलकामना है।
आप सभी को हरतालिका तीज के पावन पर्व की हार्दिक बधाई।




