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कवि सम्मेलन में गीत,गजल,कविताओं की हुई बारिस

जांजगीर।स्वतंत्रता दिवस की 78 वी वर्षगांठ के पावन अवसर पर ज्ञानोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शानदार आंचलिक कवि सम्मेलन का संयोजन डॉ.प्रमोद कुमार आदित्य के द्वारा  किया गया जिसके प्रायोजक ज्ञानोदय विद्यालय के संचालक डॉ सुरेश कुमार यादव द्वारा किया गया।    कविश्रेष्ठ वरिष्ठ साहित्यकार   ईश्वरी यादव के मुख्य आतिथ्य तथा वरिष्ठ साहित्यकार सजल ऋषि विजय राठौर  की अध्यक्षता व कोरबा से पधारे कृष्ण कुमार चंद्रा, बी.एल.नागवंशी व श्रीमति धन्नो सिंघानिया के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।काव्य पाठ का शुभारंभ सुश्री लक्ष्मी करियारे के सरस्वती वंदना से शुरू हुआ।संतोष कश्यप ने कविता पाठ करते हुए कहा विश्व गगन में ध्रुव तारा सा हिंदुस्तान है।वेद ज्ञान से अनुप्राणित यह धरा महान है। कवि डॉ.बोधी राम साहू ने देश के वीर सैनिकों पर गर्व करते हुए चिट्ठा कुछ इस तरह खोला जान हथेली पे रखकर जो शरहद की रक्षा करते है।परिवार से भी दूर रहकर ये हमारी  सुरक्षा करते है। डॉ.प्रमोद आदित्य  ने मातृभूमि की आन बान शान पर कविता इस तरह से पढ़ा माँ भारती संस्कार दे नव चेतना उपहार दे।नव वर्ष मंगलमय रहे प्रमुदित समय का प्यार दे। मधुर कंठ के स्वामी बी. एल.नागवंशी ने गीतों की फुलझड़ी से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया ।कोरबा के कवि कृष्ण कुमार चंद्रा ने छत्तीसगढ़ी और हिंदी में कविता की प्रस्तुति की ।ठाकुर व्यास गुमसुम ने कहा दागे गे बन्दुक जो है आँख तरेरने वाला ।हम अजाद हिन्द ,है आजादी से मरने वाला। मुख्य अतिथि ईश्वरी यादव ने अपने उद्बोधन में कहा जांजगीर साहित्य के क्षेत्र में पुष्पित था,है और रहेगा।जिस बात से हमे गर्व की अनुभूति होती है। कार्यक्रम अध्यक्ष विजय राठौर ने सजल रचना प्रस्तुत की।कवि दशरथ मतवाले ने भारत को सोने की चिड़िया कहते यूं गुनगुनाया मोर भारत भुइयां सोन चिरैया चह चह चहके।अरुण तिवारी ने अपने गीतों में नैतिकता के बुझे दीप को जलाने की बात की। डॉ.लक्ष्मी करियारे ने देश प्रेम को अपनी बानगी में यूं कहा लहर लहर लहराए तिरंगा,मान ल तोर बढ़ाए।बाराद्वार से पहुंचे रमेश सिंघानिया ने गीत यूं पिरोया संकल्पों से अनुबंधित हो कदम बढ़ाना है।
संचालन कर रहे दयानंद गोपाल ने अपनी कविता में देश प्रेम की बातें कही।रामरतन साहू ने अपनी कविता यू प्रस्तुत की सारे जग में इसकी शान हम सब करे इसे सलाम तिरंगा फहर रहा है। डॉ.सूरज श्रीवास ने कविता में कहा भारत मां की रक्षा में वो हो गए कुर्बान।महेंद्र राठौर गजल गो ने मुहब्बत की शोखियों पर गजल प्रस्तुत कर खूब तालिया बटोरी।श्रीमति  चन्द्र किरण सोनी ने तिमिर फिर से हटाने दीप सा जलते रहने की बात की।श्रीमति ममता तिवारी ने कहा उठा लो नाज तुम भी आज इस न्यारे तिरंगे का।मोबिना परवीन ने कहा कौन कहता है ये उसकी वो  उसकी माटी है। पुनीता दरियाना ने कहा जो लहू से है सनी वो वादियों कहने लगी। महेश राठौर मलय ने यू रचना पढ़ा लालिमा बनना प्राची की प्रतीति की।हजारीलाल कुर्रे ने अपनी रचना में कहा मनखे अव मनखे जस रहव ग।आनंद पांडे ने जीने में साहस की बात की। सुरेश पैगवार ने अपनी कविता में खुशियों को बांटने की बात की।नोबेल श्रीवास ने कहा कुछ कागज के टुकड़ों के खातिर।इस दौरान रामगोपाल राठौर,विजय श्रीवास,रमेश तिवारी,रोशन केशरवानी सहित अधिसंख्य उपस्थित रहे व कवि सम्मेलन का आनंद लिए।

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