रजत जयंती महोत्सव पर पं. जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय नवागढ़ में भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह सम्पन्न

नवागढ़।छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की रजत जयंती वर्षगांठ के अवसर पर पं. जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय नवागढ़ के तत्वावधान में “एलुमनी मीटिंग – भूतपूर्व छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह” बड़े ही हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की संचालक महोदय डॉ. विनोद अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. राजेश शर्मा द्वारा मां सरस्वती के तैलचित्र पर पुष्प एवं श्रीफल अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के संचालक डॉ. विनोद कुमार बंसल एवं मुख्य अतिथि नवागढ़ ब्लॉक के वरिष्ठ अधिकारी सहायक खंड शिक्षा अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री जायसवाल ने अपने संबोधन में छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि “देश के विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षक होते हैं”। उन्होंने जीवन में सफलता प्राप्त करने हेतु अनुशासन, परिश्रम और दृढ़ संकल्प को आवश्यक बताया।
संचालक डॉ. बंसल ने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे महाविद्यालय के प्रति अपने प्रेम एवं स्नेह को सदैव बनाए रखें तथा कैरियर संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु महाविद्यालय से निरंतर जुड़े रहें।
कार्यक्रम में अध्यापकगणों द्वारा भूतपूर्व छात्रों की यादों को पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया गया। साथ ही उपस्थित पूर्व छात्रों को उनके जीवन की सफलता के अनुभवों को मंच पर व्यक्त करने का अवसर दिया गया। उन्हें महाविद्यालय की ओर से प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। मनोरंजन हेतु खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया तथा सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई।
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकगण श्रीमती प्रीति देवांगन (कार्यक्रम प्रभारी), सुश्री मालती बंजारे, सुश्री यशोदा शांते, श्रीमती लक्ष्मीन, सुश्री कविता, श्री अनुभव साहू, श्री सतीश दास महंत, श्री अखेंद्र जांगड़े, श्री आलोक चंद्रा, श्री दीपक चंद्रा, श्री जोहित कश्यप, श्री शिवरात्रि साहू, श्री आरथो , श्री कमल प्रसाद , श्री सुदर्शन साहू, सुश्री रजनी साहू, श्री विकास विश्वकर्मा एवं महाविद्यालय के छात्र छात्राओं बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
रजत जयंती वर्ष के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम भूतपूर्व छात्र-छात्राओं के लिए स्मरणीय क्षणों से परिपूर्ण रहा तथा महाविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच आत्मीयता एवं सहयोग की नई परंपरा स्थापित कर गया।




