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कुटरा में आज भी विश्वास और सहयोग  से बनते हैं घर,

मकान बनाने प्रदीप का सपना होगा पुरा, राघवेन्द्र सरकार ने दिया भरोसा

जांजगीर-चांपा।जहां आज के दौर में लोग अपनों से दूरी बना रहे हैं, वहीं जिले का ग्राम कुटरा आज भी आपसी भरोसे, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की परम्परा को निभा रहे है। हाल ही में कुटरा मालगुजार परिवार से जुड़े जांजगीर निवासी राघवेन्द्र पाण्डेय के पास ग्राम कुथुर से प्रदीप नाम का एक नौजवान सहायता की उम्मीद लेकर पहुंचा। उसने बताया कि पिता के निधन के बाद उसका परिवार  संकट से जूझ रहा है। वृद्ध मां और बहन के साथ रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। उसने मधु और रामनारायण के मकान में मिले सहयोग का जिक्र किया और बताया कि आवास योजना में आवेदन स्वीकृत होने की प्रतीक्षा है, लेकिन जमीन के अभाव में निर्माण अटका हुआ है।
स्थिति सुनकर  राघवेन्द्र पाण्डेय ने उसे भरोसा दिलाया कि जैसे ही आवास स्वीकृत होगा उन्हें दो डिसमिल निजि भुमि प्रदान कर भूमिपूजन कर उनका घर बनवाया जाएगा। यह आश्वासन उस परिवार के लिए नई उम्मीद बन गया।गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि अकाल के कठिन दौर में भी  यहां कोई भूखा नहीं सोया, क्यो कि पाण्डेय परिवार वर्षों से पुरे गांव को अपने कुटुम्ब की तरह संरक्षण देते आ रहे है।

भरोसा है कि बेघर नहीं करेंगें
बेजाकब्जा हटाव अभियान के दौरान प्रशासन द्वारा गांव की मधु नाम की  महिला का मकान तोड़ दिया गया था जिसे में राघवेन्द्र पाण्डेय के  सहयोग से  दूसरी जगह बसाया गया है। बताते चलें कि गांव प्रवास के दौरान रामनारायण ने बताया कि उसने पाण्डेय परिवार की जमीन पर अपना घर बनाया है। जब राघवेन्द्र पाण्डेय ने सरल अंदाज में उनसे पूछा किस हक से ? तो उसने कहा हक तो नही है, पर भरोसा है कि कुटरा के सरकार उन्हें बेघर नहीं करेंगे, यही विश्वास कुटरा की असली ताकत है।

सामाजिक समरसता की परम्परा
17वीं शताब्दी में स्व. अजीतराम पाण्डेय द्वारा जल संरक्षण के लिए निर्माण कराया गया तालाब आज भी 75% ग्रामीणों का मुख्य जलस्रोत है, स्व. मलिकराम पाण्डेय ने वर्ष 1954 में निजि व्यय से प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला का निर्माण कराया है।

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