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पालक बालक और शिक्षक इन तीनों ने बदल दी शिक्षा की तस्वीर

शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था का नाम है जो किसी भी देश के विकास की आधारभूत कड़ी कहीं जा सकती है। इस कड़ी के तीन मुख्य पहलू नजर आते हैं पालक बालक और शिक्षक। यदि ये तीनों कड़ी आपस में एक सूत्र में मिलकर  अच्छे ढंग से कार्य करें तो शिक्षा का लाभ बहुत सारे लोगों को मिलना सहज हो जाता है। पंडित रामसरकार पांडेय शा उ मा वि कुटरा की यात्रा इसी पालक बालक व शिक्षक के आपसी समन्वय व मेहनत की कहानी है। 2014 में इस विद्यालय का परीक्षाफल केवल 44% था उस समय निराशा की लहरे चारों ओर व्याप्त थीं।ऐसा लग रहा था मानो शिक्षा रूपी ज्ञान के प्रकाश का उजाला कभी इस ग्राम के आसपास अपनी आभा  बिखेर नहीँ पाएगा । परंतु कहा गया है कि अंधेरे के बाद उजाले का आगमन अवश्य ही होता है यहां भी अनेक मेहनती शिक्षकों का आगमन हुआ जिसमें प्रमुख रूप से अनुराग तिवारी जी का नाम शामिल है। अनुराग जी के अलावा अन्य मेहनती और अनुभवी शिक्षकों का भी आगमन विद्यालय में हुआ। प्राचार्य श्री एल आर साहू के नेतृत्व में सभी शिक्षकों ने अपनी रणनीति तय की जिसमें प्रमुख रूप से रहे श्री उमेश चौबे श्री अवधेश शर्मा  श्री दौलत राम जी एवं कुजूर सर जी, श्रीमती काजल कहरा प्रमुख रहे।इन सभी शिक्षकों ने जी तोड़ मेहनत एवं परिश्रम से इस विद्यालय का परिणाम भी सामने आने लगा बच्चों में खोया हुआ आत्मविश्वास लौटने लगा और बच्चे परिणाम देने की ओर उन्मुख होने लगे।इसके बाद 2019 में श्री संदीप श्रीवास्तव जी के आगमन से विद्यालय में प्रगति के नए सोपान  गढ़ने शुरू हुये  उन्होंने बालिकाओ के लिए नवीन भवन, आधुनिक शौचालय, नया आधुनिक लैब, सुसज्जित मंच का निर्माण शासन के मद व व्यक्तिगत खर्च से किया। इससे बच्चो में पठन -पाठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसमें श्री महावीर विजर्सन भौतिक एवं श्री मकरम कमलाकर जी रसायन ने बच्चो में विज्ञानं के प्रति जागरूकता को बढ़ाया इससे उनके विज्ञान के प्रति रूचि का समग्र विकास होना शुरू हो गया। श्रीमती संगीता सिँह जी व  चन्द्रवती रात्रे जी नें बालिका शिक्षा पर काफी मेहनत की जिससे बालिका शिक्षा में सुधार हुआ।विकास का यह रास्ता आगे जाकर पालक वर्ग की ओर मुड़ा  जब पालको ने देखा कि शिक्षक इतनी अधिक मेहनत एवं आतुरता के साथ विद्यार्थियों के विकास के लिए लगे हुए हैं तो पालक वर्ग भी सामने आए जिसमें प्रमुख भूमिका रही ग्राम के मालगुजार श्री राघवेंद्र पांडेय जी एवं सरपंच  श्री राम कुमार खरे श्री राजू कश्यप श्री राजकुमार कश्यप एवं वर्तमान सरपंच श्री छतराम कश्यप की। इन सभी ने अपनी भूमिका विद्यालय के विकास में निभाई। सबसे बड़ी भूमिका ग्राम के मालगुजार राघवेंद्र पांडेय जी की रही जिन्होंने विद्यालय के विकास में अपने परिवार की जमीन ही दान में दे दी।जिससे एक विशाल विद्यालय परिसर का निर्माण होना सुनिश्चित हुआ। इस प्रकार पालक बालक एवं शिक्षक इन सभी का सहयोग लगातार  विद्यालय को मिलता गया और विद्यालय के परीक्षा परिणाम में सुधार होता गया। यह सुधार उस चरम सीमा तक पहुंच गया कि शत प्रतिशत परिणाम विद्यालय का आना शुरू हो गया और तब इस विद्यालय की पहचान राज्य स्तर में होने लगी।विद्यालय की इस प्रगति का परिणाम यह निकला कि शिक्षकों को भी राज्य एवं संभाग स्तरीय पुरस्कार मिलने  लगे 2023 में विद्यालय में उनके अनूठे योगदान के लिए श्री अनुराग तिवारी व्याख्याता हिंदी को राज्यपाल सम्मान से नवाजा गया तो ऐसा लगा कि यह सम्मान पूरे विद्यालय को मिला है।  2017 में विद्यालय ने एक अनोखी प्रगति की वह प्रगति थी सामूहिक एकजुट की जिसमें विद्यालय के सभी पालक और सरपंच गण महिला जनप्रतिनिधि सभी मिलकर श्री राघवेंद्र पांडेय जी के नेतृत्व में रायपुर पहुंचे जहां तात्कालिक मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह जी ने उनकी एकजुट को देखते हुए हायर सेकंडरी विद्यालय में उन्नयन की तत्काल स्वीकृति प्रदान की। इस प्रकार कुटरा विद्यालय जन सहयोग की एक अनोखी विशाल है। यदि अन्य विद्यालय भी कुटरा विद्यालय के इस पालक बालक एवं शिक्षक रूपी ढांचे को सीख लेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ में शिक्षा रूपी क्रांति का उदय अपने आप होना शुरू हो जाएगा।

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