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प्राचार्य श्री कंवल सिंह राठिया को दी गई विदाई

शिक्षा विभाग में 36 वर्ष 6 माह तक अपनी सेवाएं प्रदान करने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चोरिया जिला जांजगीर चांपा के प्राचार्य श्री कंवल सिंह राठिया जी को उनकी सेवा निवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गई।इस समारोह के मुख्य अतिथि जिला पंचायत जांजगीर -चांपा के उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति के सभापति श्री गगन जयपुरिया जी थे । कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्या सुश्री आशा साहू ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना से हुआ। अतिथियों के स्वागत पश्चात व्याख्याता श्री भास्कर यादव ने श्री राठिया जी के शिक्षकीय जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर राज्यपाल पुरष्कृत व्याख्याता श्री अमृतलाल साहू ने श्री राठिया जी को स्व लिखित अभिनंदन पत्र एवं संस्था प्रमुख श्री फिरत सिंह कंवर एवं व्याख्याता गण श्री जय नारायण राज, श्री बसंत गढ़े़वाल ,श्री हेमंत खटकर, श्री टीमन लाल चंद्रा ने शाल,श्रीफल, घड़ी, पेन, डायरी और विद्यालय परिवार का फोटो फ्रेमिंग देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन व्याख्याता श्री लक्ष्मी नारायण सोनी ने किया ।
अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्री गगन जयपुरिया जी ने कहा कि शिक्षक समाज के लिए कभी सेवा निवृत्त नहीं होते ।वे दीपक की तरह प्रज्वलित होकर समाज को प्रकाशवान बनाते हैं । अध्यक्षता कर रहीं सुश्री आशा साहू जी ने कहा कि राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। शिक्षक अपने ज्ञान, कौशल और गुणों से भारत को विश्व गुरु बनाने में सक्षम हैं। जानकी देवी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारागांव के प्राचार्य श्री एस आर कुर्रे ने कहा कि श्री राठिया जी पूर्ण ईमानदारी से कार्य करते हुए अपने स्कूल को एक नई ऊंचाई दिए हैं। जांजगीर चांपा जिले में यह स्कूल अपने अच्छे कार्यों के लिए जाना जाता है। ग्राम पंचायत चोरिया के सरपंच श्री बटदेव जी ने कहा कि सर जी बहुत ही ईमानदार और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं। विद्यालय के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। शाला प्रबंधन समिति के पूर्व संरक्षक श्री राजेंद्र प्रसाद शुक्ला ने कहा कि इनके सकारात्मक दृष्टिकोण और सभी के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार को हम हमेशा याद रखेंगे। शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री जीवन सूर्यवंशी ने कहा कि एक आदर्श प्राचार्य में जो गुण होने चाहिए वे सभी हमारे राठिया जी में विद्यमान हैं। श्री राठिया जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैंने अपने पूरे शिक्षकीय जीवन में विद्यालय को मंदिर, विद्यार्थियों को भगवान मानकर ईश्वर ने मुझे जितनी क्षमता दी है, पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ सेवा करने का प्रयास किया है।
इस अवसर पर व्याख्याता श्री ललित कुमार शुक्ला, श्री मोहनलाल यादव, श्री दिनेश कुमार राठौर,श्रीमती ज्योति बिंझवार, श्री नीलमणि देवांगन, श्री ताकेश्वर वैष्णव, दिग्विजय पटेल,नोहर लाल रत्नाकर,बी एस लाठिया,सन्त राम साहू, सुनील राठौर, संतोष कुमार साहू ,अन्तु राम उरांव, नेहरू लाल पटेल, मनोज देवांगन, प्रमोद केशरवानी, संजुलता उरांव, विनोद राठौर,गनपत उरांव, पुरूषोत्तम सूर्यवंशी, विष्णु देवांगन,शिव देवांगन, सुरेश देवांगन सहित सभी शिक्षक, विद्यार्थी एवं गांव के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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