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प्रयोजना में बच्चे नशा मुक्ति के संबंध में जागरूकता लाने व बालिका शिक्षा आगे बढ़ने का कर रहे प्रयास

हिंदी विषय शिक्षक अनुराग तिवारी जी की अनूठी पहल

नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य बच्चों के व्यावहारिक ज्ञान को आगे बढ़ाना है, इसके लिए कई प्रकार के उपाय शिक्षा पाठ्यक्रम में किए गए हैं इसी के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल छत्तीसगढ़ के द्वारा सत्र 2025 एवं 26 के लिए। प्रयोजना कार्य में आमूल चूल बदलाव किए गए हैं जिसमें विद्यालय यदि प्रयोजना कार्य कर रहे हैं तो उन्हें सर्वेक्षण कार्य से भी जोड़ना शामिल है। किसी को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता श्री अनुराग तिवारी जी ने बच्चों के लिए सर्वेक्षण कार्य की रूपरेखा तय की। इसके अंतर्गत उन्होंने नशा मुक्ति एवं बालिका शिक्षा को कैसे बढ़ाया जाए इस विषय में ग्रामीण लोगों की राय को शामिल करने की पहल को प्राथमिकता दी। श्री अनुराग जी ने कहा कि यदि हम ग्रामीण क्षेत्र के राय को विषय से जोड़ते हुए शामिल करें तो भविष्य में शासन को नशा मुक्ति के उपाय के बारे में जानने में सुविधा होगी साथ ही बालिका शिक्षा को बढ़ाने के लिए बहुत सारे प्रयास शासन द्वारा किए जा रहे हैं क्या वह जमीनी स्तर पर पहुंच सके हैं इसके बारे में जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा उनकी सोच यह भी है कि एक रिसर्चर के रूप में जब बच्चे सर्वेक्षण में हिस्सा लेंगे तो भविष्य में शोध कार्य में प्रवीण और दक्ष भी होते जाएंगे। विषय के अध्ययन के अलावा वे समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य भी कर सकते हैं। श्री अनुराग जी की इस पहल का सभी शिक्षाविदों ने स्वागत किया है, विख्यात समाज सेवी एवं विद्यालय के संरक्षक श्री राघवेंद्र पांडेय जी का मानना है कि इस प्रकार की सोच ही समाज को नई दशा और दिशा दे सकती है, बच्चे जब स्वयं शोधकर्ता के रूप में सामने आएंगे तो समाज की वास्तविकता का उन्हें ज्ञान होगा। विद्यालय के प्राचार्य श्री संदीप श्रीवास्तव जी ने भी अनुराग जी की इस पहल की प्रशंसा करते हुए इसे व्यावहारिक शिक्षा की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना है। विद्यालय में व्याख्याता श्री उमेश कुमार चौबे एवं अवधेश शर्मा जी के द्वारा भी सर्वेक्षण कार्य के विषय में उनके द्वारा की गई इस महत्वपूर्ण पहल का स्वागत किया गया है। भौतिक विज्ञान के व्याख्याता श्री महावीर विसर्जन भौतिक विज्ञान के व्याख्याता श्री महावीर विजर्सन जी का मानना है कि जी का मानना है कि समाज में कई बुराइयों के अलावा अच्छाइयों का भी समावेश है यह सब बच्चे जब जाने में सक्षम होंगे तो उन्हें एक सभ्य नागरिक बनने में सहायता मिलेगी। ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि श्री रामधन कश्यप एवं जन भागीदारी विकास समिति के अध्यक्ष श्री देवी निर्मलकर जी ने भी अनुराग तिवारी जी की इस प्रकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि  इस प्रकार की शोध सें समाज को विद्यालय सें जोड़ने में मदद मिलेगी। हिंदी में इस प्रकार के रचनात्मक मूलक प्रयासों की विद्यालय के व्याख्याता श्री मकरम कमलाकर श्रीमती काजल कहरा, श्रीमती नीलिमा पाठक श्रीमती चंद्रवती रात्रे, श्री कमल किशोर कौशिक एवं श्री दौलत राम थवाइत, के साथ ही व्यावसायिक शिक्षक श्री खिलेंद्र तिवारी एवं श्री दीनानाथ उपाध्याय जी के अलावा नरेश कश्यप के द्वारा भी सराहना की गई।

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