सियाराम मय सब जग जानी ! अयोध्या में रामलला

शुभ घड़ी आई , विराजेंगे रघुराई
श्रीराम विष्णु के अवतार हैं , वे आदि पुरुष हैं । मानव मात्र की भलाई के लिए मानवीय रुप में इस धरा धाम पर अवतरित हुए । मानव अस्तित्व की कठिनाईयों तथा कष्टों का उन्होनें स्वयं वरण किया , ताकि सांसारिक व नैतिक मूल्यों की रक्षा किया जा सके । उक्त उद्गार बरपाली चौक डागा कॉलोनी में रहने वाले वयोवृद्ध रोशनलाल अग्रवाल जी ने दैनिक समाचार-पत्रों से जुड़े शशिभूषण सोनी से कही । उन्होनें कहा कि बड़े ही गर्व की बात हैं कि अयोध्या के 70 एकड़ में बने राम मंदिर के गर्भगृह में रामल्ल्ला की बाल रुपी मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा अभिषेक ठीक 12:20 बजे शुभ मृगशिरा नक्षत्र के दौरान होने जा रहा हैं । अभी केवल चबूतरे पर मूर्ति रख दी गई हैं । इसी दिव्य रुप को देखने आंखें तरस रही थी । मूर्तियों के आंखों पर अभी कपड़ा लगाया गया हैं । कुछ घंटे ही अब शेष हैं जब दिनांक : 22 जनवरी 2024 को वह पल भी हट जायेगा । 121 पुजारियों को पूजा-पाठ का भार दिया गया हैं ।
शशिभूषण सोनी ने बताया कि लगभग 500 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद श्रीराम मंदिर को उनकी ही अयोध्या में स्थायी में स्थान मिला हैं । शुभ मृगशिरा नक्षत्र में मंदिर के उद्घाटन कर्ता देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी जी के साथ अन्यान्य लोग रहेगें ।मृगशिरा नक्षत्र इस पवित्र कार्य के लिए सबसे उपयुक्त क्योंकि यह खुशी और धन लाने के लिए जाना जाता हैं । यह अनुष्ठान श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा हैं । भगवान रामचंद्र जी को उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सब लोगों ने स्वीकार किया हैं । शताब्दियों का इंतजार खत्म अब खुली आंखों से देखेंगे भगवान रामल्ल्ला को ! जय श्रीराम ।




